इस अध्याय में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी जीने कभी हार नहीं मानने की बात कही है और जीवन में कभी भी अच्छे काम की शुरुआत किया जा सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य दिखाते हुए बहुत ही शानदार रचित कविता हमको सस्वर वाचन करने को इस अध्याय में मिलेंगे।
कवि ने इस कविता में तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग किया है इस कविता के माध्यम से प्रकृति के प्रति मानवीय संवेदना को व्यक्त किया है कवि ने सभी को इंगित करते हुए आशावादी दृष्टिकोण रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं इस कविता के माध्यम से कहते हैं कि अभी तो शुरुआत हुई है अभी मेरा अंत नहीं होगा। आगे- आगे देखिए हमारा कारवां कुछ और होगा। ध्वनि पाठ का उद्देश्य युवाओं को आवाहन करना चाह रहे हैं कि जागो अभी अंत नहीं हुआ है अभी तो शुरुआत है रुकना नहीं है, झुकना नहीं है ध्वनि अर्थात गरज से तात्पर्य है इस कविता में आगे हम महत्वपूर्ण बिंदु पर चर्चा करेंगे और इसी के आधार पर आपको शिक्षक डायरी एवं अपने बच्चों को शिक्षण गतिविधि सफलतापूर्वक निर्वहन करना है-
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महत्वपूर्ण बिंदु
कक्षा में कराई जाने वाली गतिविधि
1
इस अध्याय में विद्यार्थी कविता को लयबद्ध एवं सस्वर वाचन करने में सक्षम होंगे।
2
इस कविता के माध्यम से प्रकृति के प्रति रुचि जागृत करेंगे एवं पर्यावरण के महत्व को समझेंगे।
3
इस अध्याय में कविता में कैसे रायमिंग किया जाता है अर्थात तुकबंदी किया जाता है विद्यार्थी समझने में सक्षम होंगे।
4
विभिन्न कठिन शब्द जैसे अंत ,मृदुल, वसंत, पात, गात, सपना, मनोहर आदि शब्दों के सरल भाषा में अर्थ समझेंगे।
5
फूलों में आलस्य आने पर, कैसे दूर करते हैं। कवि ने विभिन्न उपाय बताए हैं कविता के माध्यम से ठीक उसी प्रकार से विद्यार्थियों में आलस्य दूर करने के तरीके विकसित करेंगे।
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कविता की कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं-
वसंत ऋतु के बारे में जिक्र किया गया है इस अध्याय में वसंत ऋतु को वसंत ऋतु ओं का राजा क्यों कहा जाता है? वसंत ऋतु को वसंत ऋतु ओं का राजा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस समय में ना अधिक बारिश होती है ना ज्यादा गर्मी होती है, और ना ही ज्यादा ठंडी होती है। सभी मौसमों का अनुकूलित समय होता है इस समय में फूल खिलने लगते हैं, पत्ते ताजे के ताजे रहते हैं, प्राकृतिक नजारा देखने लायक रहता है, विभिन्न पक्षियों के नए बच्चे जन्म लेते हैं नई किलकारियां सुनाई देती है, इन्हीं कारणों से वसंत ऋतु ओं का राजा कहा जाता है।
'हरे-हरे', 'पुष्प-पुष्प' में एक शब्द की एक ही अर्थ में पुनरावृत्ति हुई है।
कविता के 'हरे-हरे ये पात' वाक्यांश में 'हरे-हरे' शब्द युग्म पत्तों के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहाँ 'पात' शब्द बहुवचन में प्रयुक्त है। ऐसा प्रयोग भी होता है जब कर्ता या विशेष्य एक वचन में हो और कर्म या क्रिया या विशेषण बहुवचन में; जैसे-वह लंबी-चौड़ी बातें करने लगा। कविता में एक ही शब्द का एक से अधिक अर्थों में भी प्रयोग होता है-"तीन बेर खाती ते वे तीन बेर खाती है।" जो तीन बार खाती थी वह तीन बेर खाने लगी है। एक शब्द 'बेर' का दो अर्थों में प्रयोग करने से वाक्य में चमत्कार आ गया।
इसे यमक अलंकार कहा जाता है।
कभी-कभी उच्चारण की समानता से शब्दों की पुनरावृत्ति का आभास होता है जबकि दोनों दो प्रकार के शब्द होते हैं; जैसे-मन का/मनका। ऐसे वाक्यों को एकत्र कीजिए जिनमें एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो। ऐसे प्रयोगों को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित पुनरावृत शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-बातों-बातों में, रह-रहकर, लाल-लाल, सुबह-सुबह, रातों-रात,
घड़ी-घड़ी।
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'कोमल गात, मृदुल वसंत, हरे-हरे ये पात' विशेषण जिस संज्ञा (या सर्वनाम) की विशेषता बताता है, उसे विशेष्य कहते हैं। ऊपर दिए गए वाक्यांशों में गात, वसंत और पात शब्द विशेष्य हैं, क्योंकि इनकी विशेषता
(विशेषण) क्रमशः कोमल, मृदुल और हरे-हरे शब्दों से ज्ञात हो रही है। हिंदी विशेषणों के सामान्यतया चार प्रकार माने गए हैं-गुणवाचक विशेषण, परिमाणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण और सार्वनामिक विशेषण।
इस अध्याय में बच्चों को होने वाली समस्याएं-
कुछ बच्चे पुस्तक वाचन करने में असमर्थ थे।
कुछ बच्चों को इमला लिखने में परेशानी हो रही थी।
3 बच्चों को व्याकरण समझने में दिक्कतें हो रही थी।
जिन बच्चों को सीखने में दिक्कतें हो रही थी उनके लिए निम्नलिखित उपाय-
जिन बच्चों को पुस्तक वाचन करने में दिक्कतें हो रही थी उन्हें का खा गा आई यू प्रारंभिक मात्राओं का ज्ञान फिर से कराया गया।
शिक्षक वाचन के बाद उन्हें दोहराने के लिए कहा गया।
लेखन कला विकसित करने के लिए एक एक मात्र को ध्यान दिया गया।
एक ही शब्द को बार-बार वाचन एवं लेखन करवाया गया।
व्याकरण को पुनः विस्तार से अध्ययन कराया गया।
गतिविधि जो कराई जानी है ।
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बारी बारी से सभी बच्चों को कविता को लयबद्ध तरीके से वाचन करेंगे।
वसंत ऋतु में आने वाले त्योहारों के विषय में जानकारी देख कर किसी एक त्योहार पर निबंध लेखन कार्य करेंगे।
ऋतु परिवर्तन का हमारे जीवन पर कैसे प्रभाव पड़ता है इस विषय पर समूह में बैठकर विस्तार से चर्चा करने के लिए प्रेरित करेंगे।
बच्चे ख्वाब देखते हैं कैसे उनको याद रहता है कि नहीं इस विषय पर चर्चा करेंगे और ख्वाब देखने के बाद उनको डर लगता है क्या इस विषय पर भी चर्चा करके माहौल को आनंद में बनाएंगे।
भाषा को मजबूत बनाने के लिए जैसे प्रीत, रीत, आश्वासन, अनुशासन, विद्यार्थी, समानार्थी, वातावरण, सूक्ष्मदर्शी आदि शब्दों का जो जोर से उच्चारण करेंगे।
इस पेज में कक्षा छठवीं, सातवीं, आठवीं तीनों कक्षा के लिय शिक्षक डायरी आप कैसे तैयार कर सकते हैं? विस्तार से समझाया जाएगा नीचे दिए गए बिंदुओं को आप पढ़कर अपने शिक्षक डायरी में नोट कर सकते हैं लिख सकते हैं यदि अच्छा लगता है तो अपने स्कूल के सभी शिक्षकों के साथ इस पोस्ट को व्हाट्सएप के माध्यम से शेयर कर सकते हैं-
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कक्षा
कालखंड
दिनांक
विषय
7 वी
द्वितीय
12-01-022
हिंदी
अध्याय -11 रहीम के दोहे
कही रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
विपत्ति कसौटी जे कसे, तेई सांचे मीत।।
जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।
रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छांडति छोह।।
तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान।
कही रहीम पर काज हित, संपत्ति संचहि सुजान ।।
थोथे बादर क्वार के, ज्यों रहीम घहरात।
धनी पुरुष निर्धन भए,करे पाछिलिबात।।
धरती की सी रीत है, सीत घाम और मैं।
जैसी परे सो सहि रहे ,त्यों रहीम यह देह।।
अध्यापन बिंदु /
बच्चे क्या सीखेंगे ?
विद्यार्थी पुस्तक वाचन करने में सक्षम होंगे।
लयबद्ध तरीके से कविता वाचन करने में सक्षम होंगे विद्यार्थी।
बादर, मछरी ऐसे बहुत सारे शब्दों के अर्थ जानेंगे हिंदी में।
इस अध्याय के माध्यम से कविता को सस्वर वाचन करना सीखेंगे।
विद्यार्थी कविता को हिंदी में व्याख्या करना सीख पाएंगे।
कबीरदास के बारे में प्रारंभिक ज्ञान हासिल करने में सक्षम रहेंगे।
दोहे के बारे में विस्तार से समझेंगे।
संदर्भ, व्याख्या, विशेष के बारे में जानकारी हासिल करेंगे।
विद्युत तथा परिपथ
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कक्षा
कालखंड
दिनांक
विषय
6वी
द्वितीय
12-01-022
विज्ञान
इस अध्याय में विद्यार्थी विद्युत सेल के बारे में अध्ययन करेंगे।
विद्युत सेल कैसे काम करती है इसका उपयोग क्या है इसके बारे में विस्तृत से सीखेंगे।
इस अध्याय में क्रियाकलाप के माध्यम से विद्युत सेल से जुड़ा हुआ बल्ब कैसे व्यवहार करता है? इसके बारे में भी प्रयोग के माध्यम से सीखेंगे।
विद्युत परिपथ किसे कहते हैं? जानने में सक्षम होंगे।
विद्युत स्विच का निर्माण कैसे करते हैं? इसके बारे में बेसिक जानकारी हासिल करेंगे।
विद्युत चालक तथा विद्युत रोधक किसे कहते हैं? जानने में सक्षम होंगे।
विद्युत धारा किन-किन पदार्थ प्रभावित होती है इसके बारे में प्रारंभिक ज्ञान इस अध्याय के माध्यम से जानेंगे।
कार्य विधि -
कार्य विधि कराने से पहले अपने बच्चों को विद्युत से होने वाली खतरा के बारे में विस्तृत रूप से समझाना है। एवं खतरा के निशान क्यों होता है? खंभे में लगे तार को क्यों नहीं छूना चाहिए जरूरी सावधानी अपने कक्षा में अवश्य बच्चों को बताएं इस आधार पर आप कार्यविधि करा सकते हैं-
एक टॉर्च लेते हैं और टॉर्च के बल्ब के भीतर देखते हैं चाहे तो हम टॉर्च से बल्ब को बाहर निकाल सकते हैं। देखते हैं कि कांच के बल्ब के मध्य एक पतला तार देखते हैं फिर स्विच दबाकर देखते हैं कि बल्ब के कौन से भाग दीप्त है।
दिए गए पाठ्यपुस्तक में छाया क्षेत्र के अनुसार बल्ब को विभिन्न प्रकार से जुड़ेंगे और बच्चों को कब दीप्त होता है कब नहीं इस बारे में विस्तृत से समझाएंगे।
क्रियाकलाप-
दो ड्रॉइंग पिन, एक सुरक्षा पिन (या पेपर क्लिप) दो तार तथा थर्मोकोल या लकड़ी के बोर्ड से एक विद्युत्-स्विच तैयार कर सकते हैं। सुरक्षा पिन की रिंग में एक ड्रॉइंग पिन लगाकर इसे थर्मोकोल शीट पर गाड़ दीजिए, (पाठ्य पुस्तक में दिया गया क्रियाकलाप को पढ़कर आप इस विधि को कक्षा में करा सकते हैं एवं शिक्षक डायरी में इसके बारे में लिख सकते हैं)
teacher diary pdf in hindi❤class 6th,7th,8th
कक्षा
कालखंड
दिनांक
विषय
8वी
द्वितीय
12-01-022
सा.विज्ञान
अध्याय - 6 संचार माध्यमों को समझना
संचार माध्यम किस प्रकार एजेंडा बनाते हैं इनका प्रजातंत्र में क्या प्रभाव पड़ता है इस पर स्वतंत्र विचार रखने में सक्षम होंगे सभी विद्यार्थी।
विद्यार्थी इस अध्याय के माध्यम से विभिन्न संचार माध्यमों को विस्तार से जानेंगे कैसे कार्य करते हैं समझेंगे।
विभिन्न संचार माध्यम जैसे टीवी रेडियो अखबार इंटरनेट और संचार के अन्य संसाधनों के उपयोग को समझने में सक्षम होंगे।
संचार माध्यमों में तकनीक तथा मशीनों का उपयोग किस प्रकार से किया जाता है और कैसे अधिक लोगों तक जानकारी प्रसारित किया जाता है इसके बारे में जानकारी हासिल करेंगे।
प्रजातंत्र में संचार माध्यम किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जाने में सक्षम होंगे।
We discussed the many movements our bodies are capable of. Healthy bones, muscles, joints, and cartilages are needed by the body for all these movements. Some of us suffer from conditions that could make these movements not so easy. In a whole class activity, try to find ways that one would manage everyday activities if any one of our body movements was not possible. In Activity 1, for instance, you tied a scale on your arm and disabled the elbow movement. Think of other ways of restricting normal body movements and find ways that everyday activities could then be managed.
EDUCATION STANDARDS
Bones and cartilage form the skeleton of the human body. It gives the
frame and shape to the body and helps in movement. It protects the
inner organs.
The human skeleton comprises the skull, the backbone, ribs and the
breast bone, shoulder, and hip bones, and the bones of hands and legs.
The bones are moved by alternate contractions and relaxations of two
sets of muscles.
The bone joints are of various kinds depending on the nature of the joints
and direction of movement they allow.
Strong muscles and light bones work together to help the birds fly. They
fly by flapping their wings.
Fish swim by forming loops alternately on two sides of the body.
Snakes slither on the ground by looping sideways. A large number of
bones and associated muscles push the body forward.
The body and legs of cockroaches have hard coverings forming an outer
skeleton. The muscles of the breast connected with three pairs of legs
and two pairs of wings help the cockroach to walk and fly.
Earthworms move by alternate extension and contraction of the body
using muscles. Tiny bristles on the underside of the body help in gripping
the ground.
Snails move with the help of a muscular foot.
If you want to write a teacher diary, then you can prepare a teacher diary on the basis of the points given below
STEPS
teaching point /
What will the kids learn?
1.
All the students will learn about the various joints of our body.
2.
Students will be successful in knowing how animals move from one place to another.
3.
Students will be able to know what is the importance of yoga for the human body.
4.
The student will be able to know which of the skull bones are movable.
5.
All students will be able to understand in detail why our elbows are unable to move backward.
With the Cube and Cube Root chapter, children can understand various events used in daily life through question and answer questions of the book and this chapter aims to develop mathematical understanding of children.
EDUCATION STANDARDS
In this chapter, the division will also be taught keeping in mind the previous knowledge of the students and also observing it in a proper way.
Children will be taught to multiply through the game methods and children's mental understanding will be developed
STEPS
Teaching point
1.
Students will be able to understand the cube with examples
2.
Students will learn about perfect cubes and be able to learn examples that are used in daily life.
3.
Students will be able to find the cube root of numbers by the method of prime factorization.
4.
will learn to draw cuboids
Children in middle school are at such an age, nor can it be called childhood. Neither can adolescence. They live in the middle of both stages, it becomes a little difficult to understand them.
Below are some tips for teaching children, on this basis you can teach middle school children.
यदि आप शिक्षक हैं और मिडिल स्कूल को पढ़ा रहे हैं। आज के इस ब्लॉग में आपको समय देना बहुत ही जरूरी है जी हां मिडिल स्कूल में बच्चे ऐसे ऐज में होते हैं ना ही बचपन कह सकते हैं। ना ही किशोरावस्था कह सकते हैं। ये दोनों अवस्था के बीच में रहते हैं इनको समझना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है। मिडिल स्कूल के बच्चों को कैसे पढ़ाएं?(How to Teach Middle School Students)
आज के इस पोस्ट के माध्यम से आपको बच्चे लोग को समझने में आसानी होगी।
निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर आप मिडिल स्कूल के बच्चों के साथ कम्युनिकेशन
(Communicating with Middle School Students) बढ़ा सकते हैं-
अपने पाठ को छोटे-छोटे विभाजित कीजिए-
STEPS
Communicating with Middle School Students
1.
Divide your lesson into chunks.
2.
Limit the number of lectures.
3.
Teach with visuals.
4.
Build your lessons around your student's voices.
5.
Value your student's emotions.
6.
Keep your lesson plans diverse.
1 अपने पाठ को भागों में बांटें(Divide your lesson into chunks)-सबसे पहले अपने पाठ को छोटे-छोटे भाग में बाँटिये अर्थात 7 मिनट या 10 मिनट ऐसे टुकड़ों में आपको विभाजित करना है। ताकि आपके जो पाठ /अध्याय हैं और रोचक पूर्ण तरीके से बच्चों को आकर्षित करते रहे।
सबसे पहले बच्चों को उनके पूर्व ज्ञान के अनुसार उनको वाद-विवाद कराइए , प्रयोग करवाइए या कोई ऐसा लेखन कार्य दीजिए जिससे बच्चे खुद करने लगे खुद से सीखने लगे यह सबसे पहले आपको करना है।
2 सटीक अर्थ समझाइये(limit the amount of lecture) - रिसर्च से पता चला है कि मिडिल स्कूल के बच्चे केवल 10 या 12 मिनट के व्याख्यान को सहन कर सकते हैं या संभाल सकते हैं। इससे अधिक उनका दिमाग आपके जो अर्थ समझाने के तरीका है उसको हटाना शुरू कर देते हैं और उनका ध्यान भटक जाता है। और हम सब जानते हैं कि व्याख्यान विधि कितना महत्वपूर्ण है अध्यापन कार्य में इस समस्या को आप निम्नलिखित विधियों के माध्यम से निपट सकते हैं-
कोई भी कहानी या कविता पढ़ा रहे हैं उसको केवल पुस्तक पढ़ कर या फिर ब्लैक बोर्ड में लिखकर ना बताएं कक्षा के सभी दिशाओं में घूमे और बच्चे लोग को जैसे कहानी सुना रहे हैं गीत गा रहे हैं ऐसे रोचक तरीके से अध्यापन करवाएं।
जब आप कोई भी गतिविधि कर आते हैं तो बच्चों से आंख मिलाना बिल्कुल सुनिश्चित करें सुनिश्चित करें कि वे जानते हैं कि आप उनसे सीधे बात कर रहे हैं इसलिए आई कांटेक्ट होना बहुत ही जरूरी है अगर आप विषय को अच्छी तरह से समझाना चाहते हैं तो आई कांटेक्ट बहुत महत्वपूर्ण पहलू है इस पर अवश्य ध्यान रखें।
😇How to Teach Middle School Students
3 विडियो का उपयोग करके पढ़ाएं(Teach with visuals)- वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि बच्चे सुनने से ज्यादा देखने (विजुअल) में ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। आपके स्कूल यदि टेलीविजन की व्यवस्था है तो उसमें जरूर प्रोजेक्ट बनाइए और अच्छा-अच्छा विजुअल दिखाइए विषय से संबंधित इससे पढ़ाने में भी मजा आता है और बच्चों को पढ़ने में भी बहुत मजा आता है इसलिए ऐसा विजुअल तरीका जरूर अपनाएं अगर नहीं है तो व्यवस्था अवश्य करवाएं।
विज्ञान विषय में जैसे पौधे कैसे बढ़ते हैं जीव जंतु भोजन कैसे से आप एक वीडियो के माध्यम से समझाएंगे तो बच्चे आसानी से समझ सकते हैं इसलिए ऐसा विषय को अवश्य विजुअल स्टडी करवाएं।
गणित में भी बहुत सारे ऐसे सवाल हैं जिसमें आमतौर पर विशेष प्रकार के सामग्री का उपयोग कर सकते है। जैसे- ज्यामिति के लिए आप अलग से बॉक्स की इस्तेमाल कर सकते हैं ऐसे विषय सामग्री के इस्तेमाल अधिक से अधिक करें जो बच्चे छूकर महसूस कर सके देख सके आसानी से बच्चे सीख जाते हैं।
4. अपने छात्र के साथ अध्याय को पूर्ण कीजिए(Build your lessons around your student's voices)- जी हां मिडिल स्कूल के बच्चे अब आपको शिक्षक के रूप में, ज्ञान के स्रोत के रूप में नहीं देखते हैं, उन्हें सामग्री के बारे में स्वयं राय बनाने की आवश्यकता है। इसलिए उनको सुने और उन्हीं के साथ थोड़ा-थोड़ा समझाते हुए पाठ को पूर्ण करें।
इसके लिए उन्हें सोचने के लिए कोई थिंग पेपर दीजिए कहानी के विशेष पाठ के बारे में लिखने के लिए कहिए।
क्योंकि पाठ को आप टुकड़ों में बांट चुके हैं तो प्रत्येक टुकड़े के प्रश्न उत्तर उनको हल करने दीजिए।
👉How to Teach Middle School Students
5. छात्र के भावनाओं को विशेष ध्यान में रखें(Value your student's emotions)- मिडिल स्कूल के छात्र अधिकांश तकिया कारण के बजाय भावनात्मक रूप से अपने आसपास के दुनिया से संबंधित होंगे। जब विषय सामग्री की तैयारी करते हैं तो उसके भावनात्मक रूप को बिल्कुल ध्यान में रखकर ही तैयार कीजिए।
भावना से संबंधित जैसे अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, हिंदी, जहां तक गणित में भी आप कहानी सुनाइए बच्चों को दैनिक जीवन से संबंधित कहानी उनको बताइए और उनके आसपास में होने वाली घटनाओं का जिक्र करते हुए अध्यापन करवाइए।
आपके छात्रा के साथ आना तो रूप में जोड़ने के लिए हाथ से भी एक प्रमुख हथियार है अब अपने कक्षा में बिल्कुल कॉमेडी करते रहें ताकि बच्चे को कभी एहसास ना हो कि आप उनको समझा रहे हैं या ज्ञान दे रहे हैं बिल्कुल उनको एहसास होने ना दे।
6. पाठ योजना तैयार करते समय विशेष ध्यान रखें(Keep your lesson plans diverse)- जी हां अब तक के जितने भी मैं ऊपर विधि बताया हूं उनमें से सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट जो है पाठ योजना जब आप तैयार करते हैं तब क्या ध्यान रखना चाहिए? मेरा यह उद्देश्य है कि पाठ योजना और शिक्षक डायरी से संबंधित हर एक पहलू को इस ब्लॉग और मेरे युटुब चैनल पर डालू और इसी से संबंधित एक कड़ी है आप हमारे साथ ऐसे ही जुड़े रहे आपको बहुत महत्वपूर्ण जानकारी शिक्षक के लिए जो आवश्यक है वह मिलेगी।
पाठ योजना तैयारी करते समय आप को बच्चों के पूर्व ज्ञान को ध्यान में रखना है।
ऐसे विषय सामग्री का ध्यान रखना है जो बच्चे छू सके समझ सके उनको देख सके ऐसे विषय वस्तु का इस्तेमाल होना चाहिए।
प्रश्न उत्तर को भी एकदम रोचक तरीके से आप तैयार करवा सकते हैं।
कक्षा 8 वी विषय विज्ञान अध्याय -04 शिक्षक डायरी |Class 8th Subject Science Chapter-04 teacher diary pdf in hindi
शिक्षक डायरी तैयार करना सीखेंगे ? अध्याय 4 पदार्थ: धातु और अधातु इस अध्याय से बच्चे क्या क्या सीख सकते हैं ? कक्षा विधि के लिए कैसे योजना बनाएं जो बच्चे नहीं सीख पा रहे हैं? उनके लिए क्या योजना तैयार करें । इस पोस्ट में यह सब सीखेंगे तो सबसे पहले बिंदु आता है-
शिक्षक डायरी तैयार करते समय ध्यान रखेंइस अध्याय से बच्चे क्या सीखेंगे-
धातुओं में चमक होती है जबकि अधातुओं में चमक नहीं होती। ये जानने में सक्षम होंगे ।
छात्र ये जान पाएंगे सामान्यतः धातु आघातवर्धनीय और तन्य होते हैं, अधातु नहीं होते।
सभी छात्र सीखेंगे सामान्यतः धात ऊष्मा और विद्यत के सुचालक होते हैं परन्त अधातु नहीं होते।
दहन करने पर धातु ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर धातु ऑक्साइड बनाते हैं जो क्षारीय प्रकृति के होते हैं। अधातु, ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर अधातु ऑक्साइड बनाते हैं जिनकी प्रकृति अम्लीय होती है।यह जानकारी प्राप्त करेंगे।
छात्र यह भी जानेंगे कुछ धातु, जल से अभिक्रिया कर धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं। अधातु जल से अभिक्रिया नहीं करते।
धातु अम्लों से अभिक्रिया करते हैं और धातु लवण तथा हाइड्रोजन गैस बनाते हैं। सामान्यतः अधात अम्लों से अभिक्रिया नहीं करते।जानकारी हासिल करेंगे ।
कुछ धातु क्षारों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस देते हैं।
अधिक अभिक्रियाशील धातु, कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके धातु यौगिकों के जलीय विलयन में विस्थापित कर देते हैं।जानने में सक्षम होंगे ।
धातुओं और अधातुओं का दैनिक जीवन में व्यापक उपयोग होता।
आइए इस अध्याय के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर देखते हैं।इनके आधार पर भी आप शिक्षक डायरी आसानी से तैयार कर सकते हैं।और अपने बच्चों को यह प्रश्न उत्तर हल भी आप कक्षा में करा सकते हैं-
धातु और अधातु को उदाहरण सहित परिभाषित कीजिए।
उत्तर -कुछ पदार्थ कठोर चमकीले आघातवर्ध ध्वनिक और ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होते हैं।
ऐसे पदार्थ जिनमें सामान्तया यह गुण होते हैं धातु कहलाते हैं।
उदाहरण - आयरन, कॉपर, एलुमिनियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, इत्यादि
अधातु कोयले और सल्फर जैसे पदार्थ नरम है तथा दिखने में मलिन है। यह हथौड़े की हल्की चोट से टूट कर चुरा हो जाते हैं । ध्वनिक नही है और ऊष्मा तथा विद्युत की कुचालक हैं यह पदार्थ अधातु कहलाते हैं।
क्या हमारे दैनिक जीवन में धातु एवं अधातु के उपयोग हैं?
उत्तर- हमारे दैनिक जीवन में धातुओं और धातुओं के निम्नलिखित उपयोग हैं - धातुओं का उपयोग मशीनें ,मोटर गाड़ियां, वायुयान, रेलगाड़ियां उपग्रह, औधोगिक साजो सामान, खाना बनाने के बर्तन , जल बॉयलर, आदि के निर्माण में किया जाता है।
अधातु के उपयोगों से भी परिचित होंगे यहां कुछ रोचक उपयोग दिए जा रहे हैं -
अधातु जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है और जिसे सभी सचिव श्वसन के समय अंदर लेते हैं।
अधातु जिनका उपयोग उर्वरकों में पौधों की वृद्धि हेतु किया जाता है।
अधातु जिसका उपयोग जल शुद्धीकरण प्रक्रम में भी किया जाता है।
आधा तू जिसका बैंगनी रंग का बिलियन एंटीबायोटिक के रूप में घाव पर लगाया जाता है।
सबसे बड़ी मजेदार की बात पाठकों में भी भी प्रयुक्त होने वाले अधातु ही हैं।
अध्याय-04 कानूनों की समझ विषय समाजिक विज्ञान कक्षा 8 वी
शिक्षक डायरीकानूनों की समझ पाठ के लिए तैयार करें?
आप कुछ कानूनों से परिचित होंगे। शायद आपको शादी की उम्र सीमा या मताधिकार की उम्र सीमा का पता होगा। संभव है आप संपत्ति को खरीदने-बेचने के कानूनों को भी जानते हों। अभी तक आप यह जान चुके हैं कि कानून बनाने का जिम्मा संसद का होता है। क्या ये कानून सभी पर लागू होते हैं? नए कानून किस तरह अस्तित्व में आते हैं? क्या कोई कानून अलोकप्रिय या विवादास्पद भी होता है? नागरिक के नाते हमें ऐसी परिस्थितियों में क्या करना चाहिए? शिक्षक डायरी कैसे लिखे ? इस अध्याय के लिए आईये जाने -
कक्षा 8 वी विषय समाजिक विज्ञान अध्याय -04 शिक्षक डायरी-
अध्यापन बिंदु / बच्चे क्या सीखेंगे
इस अध्याय में छात्र कानून के बारे में जानेंगे ।
हमारा कानून धर्म जाति लिंग के आधार पर कोई भी भेदभाव नहीं करता पता ।सभी छात्र समझने में सक्षम होंगे कि हमारे जो कानून है वह समान रूप से सभी पर लागू होती है ।
1870 का राजद्रोह एक्ट के बारे में जानने में सक्षम होंगे।
घरेलू हिंसा कानून के बारे में छात्र जानकारी प्राप्त करेंगे ।
नए कानून कैसे बनते हैं कैसे पास होता है इस संबंध में जानकारी हासिल करेंगे ।
अलोकप्रिय या विवादास्पद कानून क्या होते हैं इन्हें परिभाषित कर पाएंगे ।
आलोचना किसे कहते हैं जानने में सक्षम होंगे ।
दमनकारी कानून क्या है जान पाएंगे।
आइए कुछ मुख्य बिंदु को देखते हैं जो आपके अध्यापन कार्य को सरल एवं आसानी बना सकते हैं। तो इन परिभाषा को आप याद रखें और अपने कक्षा गतिविधि में परिभाषित कर के सभी बच्चों को समझाएं-
आलोचना-किसी व्यक्ति या चीज़ में कमियाँ निकालना या उसे अस्वीकार कर देना। इस अध्याय में आलोचना शब्द का इस्तेमाल सरकार
के कामकाज पर नागरिकों की ओर से होने वाली आलोचना के लिए किया गया है।
विकासक्रम- सरल से जटिल रूप तक विकास की प्रक्रिया को विकासक्रम कहा जाता है। आमतौर पर इस शब्द का इस्तेमाल पौधों या
पशुओं की किसी प्रजाति के विकास का वर्णन करने के लिए किया जाता है। इस अध्याय में विकासक्रम का मतलब इस बात
से है कि महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा प्रदान करने का विचार किस तरह एक अखिल भारतीय कानून के रूप में
विकसित हुआ।
राजद्रोह- जब सरकार को ऐसा लगता है कि उसके खिलाफ़ प्रतिरोध पैदा हो रहा है या विद्रोह किया
जा रहा है तो उसे राजद्रोह कहा जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार को किसी की गिरफ़्तारी के लिए ठोस सुबूत की ज़रूरत
नहीं होती। 1870 के राजद्रोह एक्ट के अंतर्गत अंग्रेज़ सरकार राजद्रोह की बहुत व्यापक परिभाषा का इस्तेमाल करती थी।
लिहाजा वे इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करके जेल में डाल सकते थे। राष्ट्रवादी नेता इस कानून को मनमाना मानते थे क्योंकि बहुत सारे लोगों को गिरफ़्तारी से पहले वज़ह भी नहीं बताई जाती थी। उन्हें बिना
मुकदमा चलाए ही जेल में डाल दिया जाता था।
दमनकारी-स्वतंत्र और स्वाभाविक विकास या अभिव्यक्ति को रोकने के लिए सख्ती से नियंत्रण स्थापित करना। इस अध्याय में उन कानूनों को दमनकारी कहा गया है जो लोगों को बहुत निर्मम ढंग से नियंत्रित करते हैं और उन्हें सभा करने व अपनी बात कहने सहित मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से भी रोक देते हैं।
घरेलू हिंसा कानून-जब परिवार का कोई पुरुष सदस्य (आमतौर पर पति) घर की किसी औरत (आमतौर पर पत्नी) के साथ मारपीट करता है, उसे चोट पहुंचाता है, या मारपीट अथवा चोट की धमकी देता है तो सामान्यतः इसे घरेलू हिंसा कहा जाता है। औरत को यह नुकसान शारीरिक मारपीट या भावनात्मक शोषण के कारण पहुँच सकता है। यह शोषण मौखिक, यौन या फिर आर्थिक शोषण भी हो सकता है। घरेलू हिंसा कानून, 2005 में महिलाओं की सुरक्षा की परिभाषा ने 'घरेलू' शब्द की समझ को और अधिक व्यापक बना दिया है। अब ऐसी महिलाएँ भी घरेलू दायरे का हिस्सा मानी जाएँगी जो हिंसा करने वाले पुरुष के साथ एक ही मकान में रहती हैं' या 'रह चुकी हैं।